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Dr.APJ Abdul Kalam Biography in Hindi एपीजे अब्दुल कलाम

Dr.APJ Abdul Kalam Biography in Hindi

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डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की जीवनी हिंदी में

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” डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम ” की जीवनी

एपीजे अब्दुल कलाम का वास्तविक नाम अबुल पकिर जैनुलाअबदीन अब्दुल कलाम
एपीजे अब्दुल कलाम का उपनाम मिसाइल मैन ऑफ़ इंडिया , जनता के राष्ट्रपति
एपीजे अब्दुल कलाम का व्यवसाय प्रोफेसर, लेखक, एयरोस्पेस वैज्ञानिक

शारीरिक संरचना, आदि ( लगभग )

एपीजे अब्दुल कलाम की लम्बाई (लगभग) 163 सेंटीमीटर
1.63 मीटर
5’ 4” फीट इन्च
एपीजे अब्दुल कलाम का वजन/भार

(लगभग)

60 किलोग्राम 
एपीजे अब्दुल कलाम की आँखों का रंग काला रंग
एपीजे अब्दुल कलाम के बालों का रंग श्याम श्वेत रंग

व्यक्तिगत जीवन

एपीजे अब्दुल कलाम की जन्मतिथि 15 अक्टूबर 1931
एपीजे अब्दुल कलाम का जन्मस्थान रामेश्वरम, रामानंद जिला, मद्रास प्रेसीडेंसी, ब्रिटिश भारत
( रामनाथपुरम जिला, तमिलनाडु, भारत)
एपीजे अब्दुल कलाम की मृत्यु तिथि 27 जुलाई 2015
एपीजे अब्दुल कलाम का मृत्यु स्थान शिलांग, मेघालय, भारत
एपीजे अब्दुल कलाम की आयु 84 वर्ष ( मृत्यु के समय तक की आयु )
एपीजे अब्दुल कलाम की मृत्यु का कारण IIM  में लेक्चर देते समय – दिल का दौरा पड़ने से
एपीजे अब्दुल कलाम की समाधि स्थल पेई करुंबू, रामेश्वरम, तमिलनाडु, भारत
एपीजे अब्दुल कलाम की राशि तुला राशि
एपीजे अब्दुल कलाम की राष्ट्रीयता भारतीय राष्ट्रीयता
एपीजे अब्दुल कलाम का गृहनगर रामेश्वरम, तमिलनाडु, भारत
एपीजे अब्दुल कलाम का स्कूल/विद्यालय Schwartz Higher Secondary स्कूल,

रामनाथपुरम, तमिलनाडु, भारत

एपीजे अब्दुल कलाम का महाविद्यालय/

विश्वविद्यालय

सेंट जोसेफ कॉलेज,  तमिलनाडु, भारत
मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, क्रोमपेट,तिरुचिरापल्ली, चेन्नई, तमिलनाडु, भारत
एपीजे अब्दुल कलाम की शैक्षिक योग्यता 1954 में, मद्रास विश्वविद्यालय से अधिकृत सेंट जोसेफ कॉलेज से

भौतिकी में स्नातक
1960 में, मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से

एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में डिग्री

एपीजे अब्दुल कलाम का परिवार पिता – जैनुलाब्दीन मारकयार

(एक नाव मालिक साथ ही स्थानीय मस्जिद के इमाम)

माता– आशिमा जैनुलाब्दीन (गृहणी)
भाई– कासीम मोहम्मद, मुस्तफा कमल,

मोहम्मद मुथु मीरा लेबाई मारिकायर

बहन– असिम जोहरा ( बड़ी बहन )

एपीजे अब्दुल कलाम का धर्म इस्लाम धर्म
एपीजे अब्दुल कलाम की जाति तमिल मुस्लिम
एपीजे अब्दुल कलाम का शौक वीणा बजाना, प्रेरक व्याख्यान देना, सैर करना,

भारतीय शास्त्रीय संगीत सुनना

एपीजे अब्दुल कलाम  के

पुरस्कार / सम्मान

1981 में  भारत सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
1990 में  भारत सरकार द्वारा पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।
1997 में  भारत सरकार द्वारा भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
1998 में  भारत सरकार द्वारा वीर सावरकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
2007 में  ब्रिटेन रॉयल सोसाइटी द्वारा किंग चार्ल्स द्वितीय मेडल सेसम्मानित किया गया।
2009 में अमेरिका एएसएमई फाउंडेशन (ASME Foundation)द्वारा हूवर मेडल से सम्मानित किया गया।
2013 में  राष्ट्रीय अंतरिक्ष सोसाइटी द्वारा वॉन ब्रौन पुरस्कारसे सम्मानित किया गया।
2014 में एडिनबर्ग विश्वविद्यालय, ब्रिटेन द्वारा डॉक्टर ऑफ साइंस उपाधि

से नवाजा गया।

एपीजे अब्दुल कलाम की

कुछ प्रसिद्ध किताबें

  • मिशन इंडिया
  • 2006 में Indomitable Spirit
  • 2002 इगनाइटेड माइंड्स
  • 1999 विंग्स ऑफ फायर
  • 1998  में इंडिया 2020
  • यू आर बोर्न तो ब्लॉसम
  • 2012 में Turning Points
एपीजे अब्दुल कलाम के

कुछ प्रमुख कथन

• “इंसान को कठिनाईयों की आवश्यकता होती है,

क्योंकि सफलता का आनंद उठाने के लिए ये जरुरी हैं।”

 

• कृत्रिम सुख की बजाए ठोस उपलब्धियों के पीछे समर्पित रहिए।

 

• अगर आप सूर्य की तरह चमकना चाहते हो,

तो पहले सूर्य की तरह जलना सीखो।

 

• गरीबी ने मुझे एक शाकाहारी बनने के लिए मजबूर किया,

लेकिन अंत में मैंने इसे पसंद करना शुरू कर दिया।

 

• एक अच्छी पुस्तक हजार दोस्तों के बराबर होती है,

जबकि एक अच्छा दोस्त एक पुस्तकालय के बराबर होता है।

 

• जिस दिन हमारे सिग्नेचर ऑटोग्राफ में बदल जाएं,

मान लीजिए आप कामयाब हो गए।

 

• “सर्वोत्तम व्यक्ति वे नहीं हैं जिन्होंने अवसरों का इंतजार किया बल्कि वे हैं

जिन्होंने अवसरों को अपनाया, जीता और सफल बनाया।”

 

• आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते पर आप अपनी आदतें बदल सकते हैं

और निश्चित रूप से आपकी आदते आपका भविष्य बदल देगी।

 

• अपने कर्म को सलाम करो, दुनियाँ तुम्हें सलाम करेगी,

यदि कर्म को दूषित रखोगे तो हर किसी को सलाम करना पड़ेगा।

एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर

स्थान / संस्थाएं

30 जुलाई 2015 में  उत्तर प्रदेश राज्य सरकार ने उत्तर प्रदेश

तकनीकी विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) का नाम बदलकर

“एपीजे अब्दुल कलाम तकनीकी विश्वविद्यालय” रख दिया।

 

31 जुलाई 2015 में  ए पी जे अब्दुल कलाम मेमोरियल त्रावणकोर इंस्टीट्यूट

ऑफ  डिसीज

(Digestive Diseases), केरल।

 

केरल में केरल में, केरल में महात्मा गांधी विश्वविद्यालय में

उनकी ओर से नई शैक्षणिक स्थानों का निर्माण किया जाता है।

 

पुडुचेरी सरकार द्वारा कहा गया 16 अगस्त, 2015

नई दुल्हन विज्ञान केंद्र-सह-सह-कूलिन एपीजे शुरू होता है

अब्दुल कलाम नाम में संग्रहीत किया जाएगा।

अगस्त 2015 में केरल विश्वविद्यालय विश्वविद्यालय का नाम

एपीजे अब्दुल कलाम टेक्नोलॉजीज विश्वविद्यालय रखा गया है।

 

सितंबर 2015 में ओडिशा राष्ट्रीय मिसाइल परीक्षण स्थान

पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम की ओर से “व्हीलर द्वीप” नाम

“अब्दुल कलाम द्वीप” बचाया।

 

मई 2017 में, जिसे अभी नासा में एपीजे अब्दुल कलाम द्वारा मांगा गया था

पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की ओर से जीव का नाम

“एक पीजे अब्दुल कलाम” बचाया। यह केवल बैक्टीरिया के रूप में अंतरराष्ट्रीय है

अंतरिक्ष स्टेशन ही पाया जाता है। ये बैक्टीरिया पृथ्वी पर नहीं पाए जाते हैं।

और सबसे महत्वपूर्ण प्रयोगशाला जेट नासा भी

प्रोपैटन प्रयोगशाला शोधकर्ताओं (जेपीएल) में बातचीत की है

एक यात्रा पर काम नए बैक्टीरिया की मांग की

और उसका नाम “सोलिबासिलस कलामी” रखें।

एपीजे अब्दुल कलाम के कुछ विवाद • भारत के राष्ट्रपति के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान, कलाम द्वारा

21 दया याचिकाओं में से 20 के भाग्य का निर्णय लेने में उनकी

निष्क्रियता के लिए आलोचना की गई।

उन्होंने  अपने 5 साल के कार्यकाल में केवल एक दया याचिका

पर कार्यवाही की, जिसमें बलात्कारी धनंजय चटर्जी की याचिका को

खारिज कर दिया गया था,  जिसे बाद में फांसी दे दी गई थी। शायद

सबसे उल्लेखनीय याचिका अफजल गुरु की थी,

जिसे 2004 में भारत की सर्वोच्च न्यायालय ने मौत की सजा सुनाई थी।

उसकी दया याचिका पर लंबित कार्रवाई होने के कारण उसकी

मौत की सजा अधर में लटकी रही।

 

• वर्ष 2005 में, कलाम ने बिहार में राष्ट्रपति शासन लागू

करने का विवादास्पद निर्णय लिया था।  जिसके कारण उन्हें कड़ी

आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

 

• वर्ष 2011 में, ए पी जे अब्दुल कलाम के द्वारा कुडनकुलम में

परमाणु ऊर्जा सयंत्र की  स्थापना का समर्थन किया गया।

जिससे स्थानीय लोग परमाणु ऊर्जा सयंत्र की स्थापना से नाराज थे।

स्थानीय लोगों ने एपीजे

अब्दुल कलाम के प्रति

नाराजगी प्रकट करते हुए, उनके इस कार्य की निंदा की।

पसंदीदा चीज़े

एपीजे अब्दुल कलाम का पसंदीदा विषय गणित, भौतिकी

प्रेम संबन्ध एवं परिवार

एपीजे अब्दुल कलाम की वैवाहिक स्थिति अविवाहित थे
एपीजे अब्दुल कलाम की पत्नी ज्ञात नहीं
एपीजे अब्दुल कलाम के बच्चे कोई नहीं

धन – संपत्ति विवरण / धन दौलत

एपीजे अब्दुल कलाम की कुल संपत्ति

( गिन लो )

  • 2,500 पुस्तकें,
  • एक वीणा,
  • एक कलाई घड़ी,
  • सीडी प्लेयर,
  • एक लैपटॉप,
  • 6 शर्ट,
  • 4 पतलून,
  • 3 सूट
  • एक जूते की जोड़ी,
  • और रामेश्वरम में उनका पैतृक घर

 

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 डॉ ए पी जे अब्दुल कलाम से जुड़ी कुछ रोचक तथ्य

  • एक तमिल मुस्लिम परिवार रामेश्वरम में उनका जन्म हुआ था।
  • रामेश्वरम और धनुष्कोडी (अब निर्जन) के बीच हिंदू तीर्थयात्रियों को ले जाने का कार्य करते थे। कलाम के पिता एक नौका के मालिक थे
  • अपने परिवार में चार भाइयों और एक बहन से कलाम सबसे छोटे थे।
  •  वे मुख्य रूप से श्रीलंका में किरयाने का व्यापार करते थे। उनके पूर्वज संपन्न व्यापारी और जमींदार थे |
  • उनके परिवार को “Mara Kalam iyakkivar (wooden boat steerers)” के ख़िताब से नवाजा गया। तीर्थयात्रियों को श्रीलंका से पंबन के बीच नाव से यात्रा करवाने के लिए
  •  उनके परिवार की आजीविका प्रभावित हुई। वर्ष 1914 में, मुख्य भूमि (मेनलैंड) से पबंन तक ब्रिज को खोला गया |
  • बचपन से ही कलाम ने ग़रीबी को बहुत नजदीक से देखा और महसूस किया, क्योंकि उनके माता-पिता की आय इतनी नहीं थी कि वह पूरे परिवार का पालन पोषण कर सकें। अपने परिवार की निर्धनता को देखते हुए, कलाम ने समाचार पत्रों के वितरण का कार्य करना प्रारम्भ किया।
  • वह धनुष्कोडी मेल ट्रेन से बाहर गिरे हुए अखबारों को एकत्रित करके दुसरी ट्रेन में सफर कर रहे यात्रियों को बेचते थे, और उसी समय विश्वयुद्ध शुरू हो गया था। विश्वयुद्ध के दौरान भी कलाम ने अपना कार्य नहीं छोड़ा।
  • एक साक्षात्कार में, कलाम ने यह खुलासा किया था कि उन्होंने युद्ध की आग को बिल्कुल समीप से महसूस किया था, क्योंकि युद्ध की आग धीरे-धीरे रामेश्वरम तक पहुंच गई थी। कलाम सिर्फ 10 वर्ष के थे, जब द्वितीय विश्व युद्ध चल रहा था।
  •  वह अपने भाई के मित्र से किताबें उधार लेकर पढ़ते थे। बचपन के बाद से उन्हें किताबें पढ़ने का शौक जागृत हुआ
  • उनके शिक्षकों ने उन्हें एक उज्ज्वल और मेहनती छात्र के रूप में वर्णित किया कि जिसके अंदर सीखने की तीव्र इच्छा थी। अपने विद्यालय में, कलाम एक औसत दर्जे के छात्र थे।

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  •  वह एयरोस्पेस इंजीनियरिंग के अध्ययन के लिए मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी गए। सेंट जोसेफ कॉलेज तिरुचिरापल्ली से भौतिकी में स्नातक करने के बाद
  • एमआईटी में एक सीनियर क्लास प्रोजेक्ट पर काम करते समय, डीन ने उनके कार्य से असंतुष्टि प्रकट की, और उन्होंने कलाम को चेतावनी देते हुए कहा कि ” यदि वह अगले तीन दिनों तक प्रोजेक्ट को नहीं समाप्त करते तो उन्हें छात्रवृति से वंचित कर दिया जाएगा।
  • तीन दिन बाद डीन ने कलम से कहा ” मैं आपके कार्य को देखकर काफी आश्चर्यचकित हुआ, कार्य करने की समय सीमा समाप्त होने तक आपने कार्य को सम्पूर्ण कर दिया। मैं आपको मुश्किलों में कार्य करने की सीख दे रहा था।”
  • वह भारतीय हवाई दल (आईएएफ) के क्वालीफायर में 9 वें स्थान पर थे, परन्तु दुर्भाग्यवश उसमे केवल आठ ही सीटें उपलब्ध थीं और जिसके कारण वह अपना लड़ाकू पायलट (Pilot) बनने का सपना साकार नहीं कर सके। कलाम ने एक लड़ाकू पायलट (Pilot) बनने का सपना देखा था।
  • वह रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की वैमानिकी विकास प्रतिष्ठान में शामिल हुए और वहां एक छोटे से होवरक्राफ्टर डिजाइनर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। हालांकि, कलाम डीआरडीओ में नौकरी करने से संतुष्ट नहीं थे। वर्ष 1960 में एमआईटी से स्नातक करने के बाद
  • उन्होंने प्रसिद्ध अंतरिक्ष वैज्ञानिक विक्रम साराभाई के अंतर्गत कार्य किया। INCOSPAR समिति के सदस्य होने के कारण
  • वर्जीनिया: Goddard Space Flight Center in Greenbelt (Maryland), Langley Research Center in Hampton; and Wallops Flight Facility. वर्ष 1963 में, कलाम ने नासा (NASA’s) के विभिन्न अंतरिक्ष केंद्रों का दौरा किया।

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  • कलाम ने स्वतंत्र रूप से एक रॉकेट प्रोजेक्ट पर काम करना शुरू किया था। वर्ष 1965 में डीआरडीओ में,
  • वह वर्ष 1980 में भारत के प्रथम उपग्रह प्रक्षेपण वाहन (एसएलवी-तृतीय) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर बने और उनके द्वारा प्रोजेक्ट उपग्रह “रोहिणी” जो पृथ्वी की कक्षा के बिल्कुल निकट है, उसका सफल प्रक्षेपण किया गया।  वर्ष 1969 में, कलाम को भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) में स्थानांतरित कर दिया गया था,
  • कलाम ने पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हेकल (पीएसएलवी) और (एसएलवी -3) प्रोजेक्ट्स को विकसित करने में काफी प्रयास किया और दोनों ही सफल साबित हुए। 1970 और 1990 के बीच
  •  किसी कारणवश कलाम इस परीक्षण में हिस्सा नहीं ले पाए। राजा रमन्ना ने कलाम को भारत के प्रथम परमाणु परीक्षण (Smiling Buddha) करने के लिए आमंत्रित किया
  • कलाम ने दो प्रोजेक्टों को निर्देशित किया :- प्रोजेक्ट डेविल और प्रोजेक्ट वोलियंट। उसी समय तत्कालीन केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दो प्रोजेक्टों को अस्वीकार कर दिया, तभी इंदिरा गाँधी (भारत की तत्कालीन प्रधानमंत्री) ने इन प्रोजेक्टों को गुप्त रूप से धन आवंटित किया। 1970 के दशक में, बैलिस्टिक मिसाइलों को विकसित करने के लिए कलाम ने एसएलवी-3 प्रोग्राम का उपयोग किया।
  • सरकार द्वारा कलाम को उन्नत मिसाइल कार्यक्रम को अपने निर्देशन में नियोजित करने का प्रस्ताव रखा गया। वर्ष 1980 में, कलाम के शैक्षिक नेतृत्व और अनुसंधान कार्य को देखते हुए,
  • मिशन के लिए 388 करोड़ रुपये का आवंटन किया। इसके साथ-साथ कलाम द्वारा मिशन अग्नि और मिशन पृथ्वी सहित कई सफल मिसाइलों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की गई। वेंकटरामन (तत्कालीन रक्षा मंत्री) ने कलाम को इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम (आईजीएमडीपी) का मुख्य कार्यकारी नियुक्त किया
  • सिमित अवधि के दौरान उन्होंने पोखरन -2 परमाणु परीक्षण को आयोजित किया, जिसमें कलाम ने अटल बिहारी वाजपेयी (भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री) के साथ एक महत्वपूर्ण राजनीतिक और तकनीकी भूमिका अदा की। जुलाई 1992 से दिसंबर 1999 तक, कलाम ने प्रधानमंत्री के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार और डीआरडीओ के सचिव के रूप में कार्य किया।
  • उन्हें “मिसाइल मैन” के नाम से पुकारा जाता है। वर्ष 1990 में, एक मीडिया कवरेज ने कलाम को भारत का सबसे कुशल परमाणु वैज्ञानिक बताया
  • कोरोनरी स्टेंट का नाम “कलाम-राजू स्टेंट” रखा। वर्ष 2012 में, दोनों ने ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य देखभाल के लिए “कलाम-राजू टैबलेट” नामक एक टैबलेट कंप्यूटर का अविष्कार भी किया। 1998 में, कलाम ने हृदय रोग विशेषज्ञ सोमा राजू के सहयोग से कम लागत वाली कोरोनरी स्टेंट (coronary stent) विकसित किया
  • अब्दुल कलाम ने भारत के 11 वें राष्ट्रपति के रूप में कार्यभार संभाला। वर्ष 2002 में, भारत के पूर्व राष्ट्रपति के आर नारायणन के कार्यकाल के बाद
  • डॉ जाकिर हुसैन (1963) ने भारत रत्न को प्राप्त कर, राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण की थी। एपीजे अब्दुल कलाम भारत के तीसरे राष्ट्रपति बने, जिन्हें राष्ट्रपति बनने से पहले भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उनसे पहले डॉ सर्वपल्ली राधाकृष्णन  (1954)
  • ऐसे अविवाहित भारतीय हैं। जिनका निवास “राष्ट्रपति भवन” बना। वैज्ञानिक होने के साथ-साथ डॉ कलाम पहले
  • राष्ट्रपति भवन में निवास के दौरान, उन्होंने कहा कि “वह अपने भोजन के लिए स्वयं भुगतान करेंगे।” उसी समय जनरल केएस डोगरा (पूर्व सैन्य सचिव एपीजे अब्दुल कलाम) ने एक घटना को याद करते हुए कहा कि “उनके रिश्तेदार पहली बार उनसे मिलने आए थे, जब वे राष्ट्रपति बने।
  • उन्होंने राष्ट्रपति भवन से कोई विशेष व्यवस्था लेने से इंकार कर दिया। अपने परिवार के साथ दिल्ली के आसपास की जगह पर घूमने के लिए एक छोटी सामान्य स्लीपर क्लास बस को किराए पर लेकर यात्रा की और जिसके लिए कलाम ने ही भुगतान किया था।
  • हालांकि, राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति और उनके परिवार के इस्तेमाल के लिए वाहनों का एक बेड़ा है, एक अस्तबल, क्लब, अस्पताल, एक गोल्फ कोर्स है, जिसे कलाम ने कभी इस्तेमाल नहीं किया। उनका एकमात्र मनोरंजन उनकी किताबें थीं, जिसे वह मुगल गार्डन में टहलते हुए पढ़ते थे।

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  •  उन्हें प्यार से “पीपुल्स प्रेसिडेंट” कहा। भारत के राष्ट्रपति (अपने कार्यकाल के दौरान) के रूप में मीडिया ने उन्हें उस नाम से पुकारा |
  • उन्होंने भारत में समान नागरिक संहिता की आवश्यकता का समर्थन किया। सितंबर 2003 में, पीजीआई चंडीगढ़ में एक इंटरैक्टिव सत्र के दौरान
  • एक मूवी में कलाम को ‘छोटू’ नाम के एक गरीब राजस्थानी लड़के पर सकारात्मक प्रभाव के रूप में चित्रित किया गया था। वर्ष 2011 में, एक हिंदी फिल्म “आई एम कलाम” को रिलीज़ किया गया,
  • 27 जुलाई 2015 को भारतीय प्रबंधन संस्थान शिलांग में जब वह “Creating a Livable Planet Earth” विषय पर सभा को सबोंधित कर रहे थे, तब अपने संबोधन के मात्र पांचवें मिनट में (भारतीय समयानुसार सायं 6:35 बजे) वह अचानक गिर पड़े। जब उन्हें समीप के Bethany Hospital में ले जाया गया |
  • तब तक  उनकी नब्ज रुकी हुई थी और उनके शरीर के जीवंत होने का कोई भी लक्षण परिलक्षित नहीं था। उसी दिन लगभग सायं 7:45 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, उनके अंतिम शब्द निम्नवत थे :- “Funny guy! Are you doing well?” जो कि उन्होंने अपने सहायक श्रीजनपाल सिंह से कहे थे।
  • डॉ अब्दुल कलाम के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए सम्पूर्ण भारत ने सोशल मीडिया पर उनके लिए श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस दुखद घटना के लिए भारत सरकार ने सात दिवसीय राजकीय शोक घोषित किया। उनके निधन पर प्रणव मुखर्जी (भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति)
  • हामिद अंसारी (भारत के तत्कालीन उपराष्ट्रपति) और राजनाथ सिंह (भारत के वर्तमान गृह मंत्री) एवं अन्य लोगों ने गहरा शोक व्यक्त करते हुए, उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए।
  • 30 जुलाई 2015 को, रामेश्वरम के Pei Karumbu Ground पर पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ अंतिम क्रिया सम्पन्न की गई।
  • उनकी अंतिम क्रिया पर नरेंद्र मोदी (भारतीय प्रधानमंत्री), राहुल गांधी, तमिलनाडु के राज्यपाल और केरल, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के मुख्य मंत्रियों सहित अंतिम क्रिया में 3.5 लाख से अधिक लोगों ने भाग लिया।
  • 27 जुलाई 2017 को, नरेंद्र मोदी (भारतीय प्रधानमंत्री) ने डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर “अब्दुल कलाम नेशनल मेमोरियल” पेइ करुम्बु रामेश्वरम के द्वीप समूह पर स्थित ( डीआरडीओ (DRDO) द्वारा बनाया गया ) मेमोरियल का अनावरण किया

  • उन्होंने अपनी आत्मकथा, “विंग्स ऑफ़ फायर” में लिखी कलाम को अपनी मां से बहुत लगाव था, और एक कविता में अपनी मां के लिए कुछ इस प्रकार स्नेह प्रकट किया:


MOTHER

“I still remember the day when I was ten,
Sleeping on your lap to the envy of my elder brothers and sisters.
It was full moon night, my world only you knew Mother!, My Mother!
When at midnight, I woke with tears falling on my knee
You knew the pain of your child, My Mother.
Your caring hands, tenderly removing the pain
Your love, your care, your faith gave me strength,
To face the world without fear and with His strength.
We will meet again on the great Judgment Day. My Mother

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माँ

“मुझे आज भी वो दिन याद है जब मैं दस साल का था,
मेरे बड़े भाइयों और बहनों की ईर्ष्या के लिए तुम्हारी गोद में सो रही है।
पूर्णिमा की रात थी, मेरी दुनिया को तुम ही जानती थी माँ!, मेरी माँ!
जब आधी रात को, मैं अपने घुटने पर गिरे आँसुओं के साथ उठा
आप अपने बच्चे का दर्द जानते थे, मेरी माँ।
आपके देखभाल करने वाले हाथ, कोमलता से दर्द को दूर कर रहे हैं
आपका प्यार, आपकी देखभाल, आपके विश्वास ने मुझे ताकत दी,
बिना किसी डर के और अपनी ताकत से दुनिया का सामना करना।
हम महान न्याय दिवस पर फिर मिलेंगे। मेरी मां



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डॉ एपीजे अब्दुल कलाम की जीवनी हिंदी में

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विदेशी पुरस्कारों से सम्मानित वैज्ञानिक

दोस्तों घर की समस्या को मजबूरी का नाम लेकर तो बहुत लोग अपने भाग्य को कोसते हैं मगर कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनके सपनों और हौसलों के आगे तकदीर को झुकना ही पड़ता है इस पोस्ट में आज हम बात करेंगे पद्म भूषण पद्म विभूषण भारत रत्न और कई विदेशी पुरस्कारों से सम्मानित वैज्ञानिक और लेखक भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ एपीजे अब्दुल कलाम के बारे में उन्हें विश्व की 40 यूनिवर्सिटीज ने डॉक्टरेट की डिग्री से सम्मानित किया था उन्होंने कई किताबें लिखी जैसे:

  • मिशन इंडिया
  • इगनाइटेड माइंड्स
  • विंग्स ऑफ फायर
  • इंडिया 2020
  • यू आर बोर्न तो ब्लॉसम

इत्यादि

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इससे उनके भारत को आगे बढ़ते देखने और युवा पीढ़ी को मार्गदर्शन देने की इच्छा साफ झलकती है उनका कहना था कि हमें भारत को एक विकसित समृद्ध और स्वस्थ देश में बदलना होगा तो आइए इनके बारे में शुरू से जानते हैं|

न्यूज़ पेपर बांटना और ट्यूशन पढ़ाना

डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का पूरा नाम अबुल पाकिर जैनुलआब्दीन अब्दुल कलाम था इनका जन्म तमिलनाडु के रामेश्वरम जिले में 15 अक्टूबर 1931 को हुआ था उनके पिता जैनुलाब्दीन नाम चलाते थे और मैं घर के काम देखती थी घर में पैसों की कमी थी जिसकी वजह से उन्होंने सिर्फ 8 साल की उम्र से ही न्यूज़ पेपर बांटना और ट्यूशन पढ़ाना शुरू कर दिया उनकी जिंदगी में दिक्कत है तो बहुत आई मगर वह उनसे कभी भी निराश नहीं हुए वह कहते थे कि जिंदगी में कठिनाइयां जरूरी हैं ताकि इंसान अपनी सफलता का आनंद ले सके|

इस्लाम का पालन करते थे

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उन्होंने अपनी स्कूल की शिक्षा बोर्ड हाई सेकेंडरी स्कूल से पूरी की जिसके बाद उन्होंने सेंट जोसेफ कॉलेज तिरुचिरापल्ली में ग्रेजुएशन की इसके बाद वह मद्रास गए और इंजीनियरिंग की पढ़ाई के लिए उन्होंने मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एडमिशन लिया| इस्लाम का पालन करते थे नमाज पढ़ना और रमजान में रोजा रखना उनकी आदतों में शामिल था जो बचपन से ही उन्हें उनके पिता ने दिखाई थी उनके पिता ने उन्हें हर धर्म की इज्जत करना भी सिखाया था|

देश-दुनिया के बारे में बात

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वह बताते थे कि उनके पिता रोज शाम को रामनाथ स्वामी टेंपल के पुजारी पक्षी लक्ष्मण शास्त्री और चर्च के पृष्ठ के साथ बैठकर चाय पीते थे और देश-दुनिया के बारे में बात करते थे कलाम का कहना था कि महान लोगों के लिए धर्म दोस्त बनाने का एक माध्यम है मगर छोटी सोच के लोगों के लिए यह लड़ने का हथियार है|

इंडियन एयर फोर्स में 8 पद आए थे और वह नौवें स्थान पर रह गए थे

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कलाम एयरफोर्स में पायलट बनना चाहते थे उस समय आई यानी इंडियन एयर फोर्स में 8 पद आए थे और वह नौवें स्थान पर रह गए थे मगर इससे हताश होने की वजह है उन्होंने दूसरी रूचि में मन लगाया इसके बाद वह अपने कार्य क्षेत्र में बहुत आगे बढ़े और बड़े वैज्ञानिक बन गए| 

भारत की पहली परमाणु परिक्षण

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उन्हीं भारत के परमाणु कार्यक्रम के पिता कहे जाने वाले राजा रमन्ना ने भारत की पहली परमाणु परिक्षण में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया था उन्होंने परमाणु और एयरोस्पेस के क्षेत्र में बहुत काम किया और अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइल बनाने में बड़ा योगदान दिया 1992 में वह प्रधानमंत्री के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार बने इसी दौरान पोकरण नामक परमाणु परीक्षण हुआ जिसमें कलाम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और इसी समय एक परमाणु वैज्ञानिक के रूप में सुर्खियों में आए और परमाणु वैज्ञानिक होने के बावजूद भी वह कभी युद्ध का समर्थन नहीं करते थे|

पड़ोसियों ने हथियार जुटा रखे हो तो

लेकिन वह चाहते थे कि भारत के पास पर्याप्त सैन्य शक्ति हो उनका मानना था कि युद्ध किसी भी समस्या का हल नहीं है लेकिन जब आपके पड़ोसियों ने हथियार जुटा रखे हो तो आपको भी अपनी सुरक्षा के लिए हथियार रखनी चाहिए सन 2002 से 2007 तक को भारत के राष्ट्रपति रहे मगर इस दौरान भी वह काफी साधारण जीवन जीते थे एक राष्ट्रपति के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए प्लेन की टिकट का खर्च सरकार उठाती है मगर उन्होंने अपने रिश्तेदारों के लिए खुद ट्रेन की टिकट करवाई थी एक बार की बात है कि उन्होंने एक समारोह में कुर्सी पर बैठने से इनकार कर दिया था क्योंकि उनकी कुर्सी बाकी कुर्सियों से बड़ी थी राष्ट्रपति पद से हटने के बाद भी वह अपने काम में काफी एक्टिव रहें|

भाषण देते समय वह गिर पड़े

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27 जुलाई 2015 को वो IIM शिलांग में भाषण देने पहुंचे थे सीढ़िया चढ़ते समय उन्हें कुछ दिक्कत महसूस हुई मगर थोड़ी देर के आराम के बाद ऑडिटोरियम में पहुंच गए मगर भाषण देते समय वह गिर पड़े उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया दोस्तों साधारण जीवन जीने वाले इस असाधारण व्यक्ति का जीवन आने वाली कई पीढ़ियों के लिए संघर्ष से सफलता हासिल करने की एक मिसाल के रूप में प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा|

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इस बात पर मुझे उनकी चार लाइन याद आ गई – जो मैं आपको हिंदी में बताना चाहूंगा –

” जब दिल में सच्चाई होती है
तो चरित्र में सुंदरता होती हैं
जब चरित्र में सुंदरता होती है
तो घर में सामंजस्य होता है
जब घर में सामंजस्य होता है
तो देश में व्यवस्था होती है
जब देश में व्यवस्था होती है
तो दुनिया में शांति होती है “

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धन्यवाद | ( OSP )

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