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Sourav Ganguly Cricket Biography in Hindi सौरव गांगुली जीवनी

Sourav Ganguly Cricket Biography in Hindi

सौरव गांगुली जीवनी व आंकड़े

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सौरव गांगुली से संबंधित कुछ प्रमुख तथ्य

( Some facts About the Sourav Ganguly  )

तथ्य / FACT जानकारी
पूरा नाम सौरव चंडीदास गांगुली ( Saurav Chandi das Ganguli )
उपनाम बंगाल टाइगर, दादा, प्रिंस ऑफ़ कोलकाता
CRICKET में मुख्य भूमिका बल्लेबाजी
खेलने की शैली बाएं हाथ के बल्लेबाजदाएं हाथ के मीडियम गेंदबाज
टेस्ट MATCH में पदार्पण 20 जून 1996, LORS’S मैदान में इंग्लैंड के विरुद्ध
ONE DAY MATCH में पदार्पण 11 जनवरी 1992, GABA में वेस्टइंडीज के विरुद्ध
IPL में पदार्पण 18 अप्रैल 2008, BANGALORE में रॉयल चैलेंजर्स के विरुद्ध

(KOLKATA KNIGHT RIDERS की ओर से खेलते हुए)

अंतिम TEST MATCH 6 नवम्बर 2008, NAGPUR में AUSTRALIA के विरुद्ध
अंतिम

ONE DAY TEST MATCH

15 नवम्बर 2007, GWALIOR में PAKISTAN के विरुद्ध
अंतिम IPL MATCH 19 मई 2012, पुणे में कोलकाता नाईट राइडर्स के विरुद्ध

( PUNE WORRIERS की ओर से खेलते हुए )

दोस्तों भारतीय क्रिकेट टीम इस समय दुनिया की सबसे मजबूत टीम में से एक है लेकिन एक वक्त ऐसा भी था जब यही टीम टेस्ट रैंकिंग में आठवें नंबर तक पिछड़ चुकी थी और इसके पीछे की जो मुख्य वजह थी वह यह कि मोहम्मद अजहरुद्दीन जो कि भारतीय टीम के कप्तान थे उनका मैच फिक्सिंग जैसे आरोपों में फसना और उनके बाद से भारतीय टीम की कमान सौंपी गई सौरव गांगुली को और फिर अपने शांत स्वभाव और शानदार कैप्टंसी के दम पर दादा ने भारतीय टीम को आठवें से दूसरे पायदान पर पहुंचा दिया और जो टीम पहले ड्रॉ करने के लिए खेलती थी अब वह मैच जीतने के नजरिए से मैदान पर उतरने लगी और दोस्तों और ना ही सिर्फ टेस्ट में बल्कि ओडीआई में भी सौरव गांगुली के ही नेतृत्व में 2003 के वर्ल्ड कप में भारतीय टीम फाइनल तक का रास्ता तय किया था और अभी दादा का नाम इसलिए भी काफी चर्चा था क्योंकि उन्हें बीसीसीआई प्रेसिडेंट के तौर पर लिया गया था और अपना पदभार संभालने के साथी हे कई सारे बड़े फैसले लिए थे |

जैसे कि उन्होंने बांग्लादेश के क्रिकेट बोर्ड के साथ डे नाइट टेस्ट मैच खेलने का भी डील किया और इस तरह से उन्होंने टेस्ट मैच की लोकप्रियता को बचाने के लिए जरूरी कदम भी उठाए थे|

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इस पोस्ट में हम जानेंगे ( Sourav Ganguly Cricket Biography in Hindi )

  • दादा
  • प्रिंस ऑफ कोलकाता
  • बंगाल टाइगर
  • महाराजा 
  • गॉड ऑफ द ऑफसाइड

जैसे कई सारे नामों से पहचाने जाने वाले सौरव गांगुली की पूरी कहानी की किस तरह से भारतीय टीम के इस कप्तान ने टीम को सिखाई दादागिरी|

सौरव गांगुली का निजी जीवन

लगभग सभी जानते है की वह एक अमीर परिवार से संबंध रखते थे. इसी का असर था कि उनका जीवन हमेशा शानोशौकत से भरा रहा. लेकिन बहुत कम लोगों को पता होगा कि जिस लड़की को वह पसंद करते थे जिसके साथ वह अपना जीवन व्यतीत करना कहते थे वह एक मध्यम वर्गीय परिवार से ताल्लुक रखती थीं. उनकी पत्नी का नाम डोना हैं. डोना एक ओडिसी नृत्यांगना हैं. दोनों ने परिवार में बहुत मतभेद हुए इसी बात को लेकर फिर भी किसी की परवाह न करते हुए और अपने परिवार के विरुद्ध प्रेम विवाह किया था. सौरव के परिवार को अपने रसूख के कारण यह रिश्ता मंजूर नहीं था. फिर भी सौरव गांगुली ने अगस्त 1996 में डोना के साथ चोरी-छिपे ( शादी कर ली ) कोर्ट मैरिज कर ली थी. और वैसे यह समय सौरव गांगुली के लिए कैरियर के लिहाज से भी महत्वपूर्ण था, क्योंकि इसी साल उनका इंग्लैंड दौरे के साथ टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण हुआ था. फिर भी सौरव दोनों मोर्चे पर सौरव सफल रहे. और जब अंत में शादी का रहस्य खुला तब दोनों के परिवार वालों ने रिश्ते को मान्यता देते हुए स्वीकार कर लिया और एक बार फिर से फ़रवरी सन 1997 में दोनों की पुरे पारिवारिक रीति-रिवाज के साथ शादी हुई. इसके बाद वर्ष 2001 में उनकी प्यारी बेटी सना का जन्म हुआ.

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सौरव गांगुली की कहानी 

तो दोस्तों इस कहानी की शुरुआत होती है 8 जुलाई 1972 से, जब कोलकाता में सौरव गांगुली का जन्म हुआ था उनके पिता का नाम चंडीदास गांगुली है और मां का नाम निरुपमा गांगुली और दोस्तों वैसे तो सौरव गांगुली को शुरू से ही आर्थिक समस्या से कभी भी नहीं जूझना पड़ा क्योंकि सौरव के पिता अपने समय में शहर के सबसे अमीर लोगों में से एक हुआ करते थे और उनका फ्लोरिशिंग प्रिंटिंग से जुड़ा हुआ कारोबार था इसके अलावा सौरभ की फैमिली में उनका एक भाई भी है जिसका नाम स्नेहशिस है और वह भी बंगाल क्रिकेट टीम में एक जाने-माने खिलाड़ी रह चुके हैं हालांकि नेशनल टीम में खेलने का उन्हें कभी भी मौका नहीं मिला वैसे बचपन में अगर देखा जाए तो अपने भाई को देख कर ही सौरभ के अंदर क्रिकेट में दिलचस्पी पैदा हुई लेकिन प्रॉब्लम यह थी कि उनकी मां ऐसा नहीं चाहती थी कि उनके बच्चे किस तरह के सपोर्ट में आगे बढ़े क्योंकि उन्हें पता था कि नेशनल लेवल पर खेलना इतना आसान काम नहीं होता है वैसे बच्चे तो बच्चे ही होते हैं|

जीवन के उतार चढ़ाव 

सौरभ लगातार क्रिकेट में अच्छा करते रहे और फिर उनके भाई ने उनका मनोबल बढ़ाना भी शुरू कर दिया और दोस्तों वैसे तो गांगुली शुरुआत में राइट हैंड बैट्समैन थी लेकिन अपने भाई का स्पोर्ट्स इक्विपमेंट यूज करने के लिए वह लेफ्ट हैंड से बैटिंग करने लगे और यहीं से लेफ्ट हैंड बैटिंग की उनकी आदत पड़ गई और फिर आगे चलकर जब घर वालों ने भी गांगुली के शानदार खेल को समझ लिया तब वह भी उनका साथ देने लगी और दसवीं क्लास के दौरान उन्हें क्रिकेट के कैंप में ऐडमिशन दिलवा दिया साथ ही बेहतर प्रैक्टिस के लिए गांगुली के पिता जी ने घर के अंदर ही जिम और कंक्रीट विकेट तैयार करवा दिया और फिर यहां पर भी गांगुली बहुत सारे मैच के अलग-अलग वीडियोस देख कर खुद को बेहतर बनाने में लगे हुए थे और फिर ओडिशा अंडर 15 में शतक लगाने के बाद गांगुली को सेंट जेवियर स्कूल टीम का कप्तान बना दिया और फिर यहीं से सौरव को काफी कम उम्र में ही कप्तानी की बारीकियों को सीखने का मौका मिला और फिर लगातार अच्छे प्रदर्शन से 1989 में गांगुली ने बंगाल की तरफ से अपनी पहली सुरुवात की और फिर घरेलू टीम के साथ रणजी में भी शानदार परफॉर्मेंस देने के बाद से उनका नाम भारत के नेशनल टीम के लिए भी लिया जाने लगा और फिर इस तरह से 11 जनवरी 1992 को वेस्टइंडीज के खिलाफ उन्होंने अपना ओडीआई डेब्यू किया हलाकि उन्होंने अपने डेब्यू मैच में उन्होंने सिर्फ 3 रन बनाए और फिर इसके बाद उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखा दिया|

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हौसला और उम्मीद 

हार ना मानते हुए उन्होंने घरेलू मैचों में वापसी करते हुए सबका दिल जीता और फिर 1993, 1994, 1995 के दौरान रणजी में रनों का अंबार लगाने के बाद से उनकी राष्ट्रीय टीम में मजबूत वापसी हुई | और फिर LORD’S  क्रिकेट ग्राउंड में 20 जून 1996 को सौरव गांगुली को टेस्ट मैच में भी डेब्यू करने का मौका मिल गया और अपने डेब्यू मैच में ही उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ शानदार शतक जड़ा और फिर इसी टूर्नामेंट के ही दूसरे मैच में भी जब वह मैदान पर उतरे तो फिर वहां पर भी शतक लगाकर उन्होंने यह संकेत सभी को दे दिया कि क्रिकेट के खेल में बंगाल टाइगर आ चुका है और फिर इसी बीच इंग्लैंड का टूर खत्म होने के बाद से Dona नाम की लड़की से गांगुली ने शादी कर ली और दोस्तों वैसे तो दोनों परिवारों के बीच बिल्कुल भी नहीं बनती थी लेकिन आगे चलकर सब कुछ सही हो गया और फिर साल 2000 में जब टीम के कुछ खिलाड़ियों का नाम मैच फिक्सिंग के आरोप में आया तब गांगुली को टीम की कप्तानी सौप दी गयी हालांकि यह दौर भारतीय टीम के नजरिए से बहुत ही बुरा गुजर रहा था

बेहतरीन कप्तान 

लेकिन अपनी शानदार कैप्टंसी में दादा ने टीम को एकजुट किया और हर मैच में ही जीत के मकसद के साथ उतरने लगे और दोस्तों 2002 में LORD’S के मैदान पर जब इंडियन टीम ने नैटवेस्ट सीरीज में इंग्लैंड को हराया था तब गांगुली ने LORD’S की बालकनी में अपना जर्सी उतार दिया और यह मूमेंट आज भी खेल प्रेमियों के लिए गोल्डन मोमेंट है इसके अलावा 2003 के वर्ल्ड कप में भी सौरव गांगुली ने भारतीय टीम का नेतृत्व किया और टीम को फाइनल तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाई और इस तरह से वो शेरों की तरह कई सालों तक आगे भी खेलते रहे और फिर आखिरकार 2008 में उन्हों क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला कर लिया|

क्रिकेट से संन्यास 

से संन्यास लेने का फैसला कर लिया हालांकि अब तक भारत के सबसे महान कप्तान और खिलाड़ियों में अपनी गिनती गिनवा चुके थे और फिर एक खिलाड़ी के तौर पर भी रिटायरमेंट लेने के बाद से वह क्रिकेट से जुड़े रहे जहा उन्होंने बंगाल क्रिकेट प्रेसिडेंट के तौर पर बंगाल के क्रिकेट को बेहतर बनाने में अहम भूमिका निभाई और 2019 में उन्हें बीसीसीआई का प्रेसिडेंट भी दिया जा चुका है और हम उम्मीद करते हैं दादा अपनी लीडरशिप स्किल्स को क्रिकेट टीम के लिए आगे आने वाले समय में उपयोग करे और एक बहेतरीन क्रिकेट के भविष्य में अपनी भूमिका निभाएंगे|

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Sourav Ganguly Cricket Biography in Hindi

सौरव गांगुली की बल्लेबाजी के आंकड़े 

( Sourav Ganguly batting record )

फॉर्मेट मैच इनिंग्स नॉट  आउट रन उच्च स्कोर औसत
टेस्ट 113 188 17 7212 239 42.18
वन डे 311 300 21 11363 183 40.73
आईपीएल 59 56 3 1349 91 25.45
फॉर्मेट स्ट्राइक रेट 100 200 50 चौके छक्के
टेस्ट 51.26 16 1 35 900 57
वन डे 73.71 22 0 72 1122 190
आईपीएल 106.81 0 0 7 137 42

 

सौरव गांगुली की गेंदबाजी के आंकड़े

( Sourav Ganguly bowling record )

फॉर्मेट मैच इनिंग्स बॉल  रन विकेट  इनिंग में श्रेष्ठ  मैच में श्रेष्ठ  रन/ ओवर  औसत  स्ट्राइक रेट
टेस्ट 113 99 3117 1681 32 28/3 37/3 3.24 52.53 97.41
वन डे 311 171 4561 3849 100 16/5 16/5 5.06 38.49 45.61
आईपीएल 59 20 276 363 10 21/2 21/2 7.89 36.3 27.6

 

सौरव गांगुली को मिले अवार्ड और सम्मान

( Sourav Ganguly awards )

क्रं. सं. अवार्ड / पुरस्कार वर्ष
1 अर्जुन पुरस्कार 1998
2 स्पोर्ट्स पर्सन ऑफ़ दी ईयर 1998
3 बंगा विभूषण पुरस्कार 2013
4 पद्म श्री पुरस्कार 2004

 

धन्यवाद –  ( OSP )

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