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Arunima Sinha Biography in Hindi | अरुणिमा सिन्हा जीवनी

Arunima Sinha Biography in Hindi

अरुणिमा सिन्हा जीवनी

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आज के इस आर्टिकल में हम जानेंगे Arunima Sinha Biography in Hindi अरुणिमा सिन्हा जीवनी के बारे में| उनके साथ हुए हादसे, दुर्घटना, हिम्मत व साहस के बारे में पूर्ण रूप से |

अरुणिमा सिन्हा का जीवन परिचय

अरुणिमा सिन्हा का असली नाम सोनू सिन्हा
अरुणिमा सिन्हा का  व्यवसाय पर्वतारोही, वॉलीबॉल खिलाड़ी
अरुणिमा सिन्हा प्रसिद्ध है माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली दुनिया की पहली विकलांग महिला होने के नाते

अरुणिमा सिन्हा जी की शारीरिक संरचना (लगभग)

अरुणिमा सिन्हा की लम्बाई 158 सेंटीमीटर
1.58 मीटर
5′ 2″ फुट इंच
अरुणिमा सिन्हा का वजन 60 किलोग्राम
132 पाउंड
अरुणिमा सिन्हा की आँखों का रंग कला रंग
अरुणिमा सिन्हा के बालो का रंग कला रंग

अरुणिमा सिन्हा जी का व्यक्तिगत जीवन

अरुणिमा सिन्हा की जन्मतिथि 20 जुलाई 1988
अरुणिमा सिन्हा की उम्र 34 वर्ष ( 2022 में )
अरुणिमा सिन्हा का जन्मस्थान पांडा टोला, शाहजादपुर, अकबरपुर, अंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश
अरुणिमा सिन्हा की राशि कर्क राशि
अरुणिमा सिन्हा की राष्ट्रीयता भारतीय राष्ट्रीयता
अरुणिमा सिन्हा का निवास स्थान अकबरपुर, अम्बेडकर नगर, उत्तर प्रदेश
अरुणिमा सिन्हा का स्कूल शासकीय कन्या इंटर कॉलेज, अकबरपुर, उत्तर प्रदेश
अरुणिमा सिन्हा का विधालय / कॉलेज नेहरू पर्वतारोहण संस्थान, उत्तरकाशी, उत्तराखंड
अरुणिमा सिन्हा की शैक्षिक योग्यता • समाजशास्त्र में एमए
• एलएलबी
• नेहरू पर्वतारोहण संस्थान से पर्वतारोहण में एक पाठ्यक्रम
• स्ट्रेथक्लाइड विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की मानद उपाधि
अरुणिमा सिन्हा का धर्म हिन्दू धर्म
अरुणिमा सिन्हा की जाती कायस्थ:
अरुणिमा सिन्हा की खान शाकाहारी
अरुणिमा सिन्हा के  शौक स्केचिंग, बागवानी, योग करना, यात्रा करना, संगीत सुनना, आदि
अरुणिमा सिन्हा के पुरूस्कार व सम्मान • 2012 का एस्पायर यंग अचीवर अवार्ड

• 2013 में, इंडिया टीवी ने उन्हें सलाम इंडिया वीरता पुरस्कार प्रदान किया; 2015 में, उन्हें पद्म श्री से सम्मानित किया गया था।

• उत्तर प्रदेश सरकार का यश भारती पुरस्कार

• 2016 में, तेनजिंग नोर्गे को राष्ट्रीय साहसिक पुरस्कार मिला।

अरुणिमा सिन्हा के कुछ विवादित विवाद • 12 अप्रैल, 2011 को उसकी ट्रेन दुर्घटना के बाद, घटना की पुलिस जांच ने उसके घटनाओं के बारे में संदेह पैदा किया। पुलिस के अनुसार यह कथित तौर पर उसके द्वारा आत्महत्या का प्रयास था। पुलिस के दावे के विपरीत, इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने भारतीय रेलवे को अरुणिमा को 500,000 रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया।

• अरुणिमा के राष्ट्रीय स्तर की वॉलीबॉल खिलाड़ी होने के दावे पर सवाल उठाया गया था, जब साई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि अरुणिमा के माता-पिता द्वारा प्रदान किए गए प्रमाण पत्र के आधार पर, यह कहा जा सकता है कि अरुणिमा राष्ट्रीय स्तर पर खेली, लेकिन विभाग और मंत्रालय को अभी यह निर्धारित करना है कि क्या वह एक परिभाषित स्तर पर एक राष्ट्रीय खिलाड़ी का दर्जा था।

• दिसंबर 2017 में, उसे एक ड्रेस कोड का हवाला देते हुए उज्जैन महाकाल मंदिर में प्रवेश से वंचित कर दिया गया था, जिसे उसने गर्भगृह में नहीं माना था। इस घटना के बाद, अरुणिमा ने ट्विटर पर कहा, “मुझे आपको यह बताते हुए बेहद खेद हो रहा है कि महाकाल मंदिर (उज्जैन में) जाने से मुझे एवरेस्ट फतह करने से ज्यादा पीड़ा हुई।” वहां (महाकाल में) मेरी दुर्बलता का मजाक उड़ाया गया था।

अरुणिमा सिन्हा जी का प्रेम संबन्ध एवं अन्य जानकारियां

अरुणिमा सिन्हा की वैवाहिक स्तिथि शादीशुदा
अरुणिमा सिन्हा की शादी की तिथि पहली शादी- साल 2012
दूसरी शादी- 21 जून 2018
अरुणिमा सिन्हा की शादी का स्थान आलमबाग, लखनऊ पर

अरुणिमा सिन्हा जी का परीवार

अरुणिमा सिन्हा का पति पहला पति- नाम ज्ञात नहीं है
दूसरा पति- गौरव सिंह (पैरालिंपियन)
अरुणिमा सिन्हा के माता पिता पिता- नाम ज्ञात नहीं है
माता- नाम ज्ञात नहीं है
अरुणिमा सिन्हा के भाई बहन भाई (ओं) – ओम प्रकाश (बड़े; पूर्व-सीआईएसएफ कार्मिक) और 1 और (नाम ज्ञात नहीं)
बहन- ज्ञात नहीं है

अरुणिमा सिन्हा की पसंदीदा चीजें

अरुणिमा सिन्हा के पसंदीदा खलाड़ी युवराज सिंह, एमसी मैरी कॉम, आदि
अरुणिमा सिन्हा के पसंदीदा ( पर्वत चढ़ाईकर्ता ) बचंदरी पाल
अरुणिमा सिन्हा के पसंदीदा नेता अटल बिहारी वाजपेयी
अरुणिमा सिन्हा के पसंदीदा लीडर विवेकानंद, एपीजे अब्दुल कलाम
अरुणिमा सिन्हा के पसंदीदा क्रन्तिकारी चंद्रशेखर आजाद
अरुणिमा सिन्हा के पसंदीदा व्यवसायी रतन टाटा जी
अरुणिमा सिन्हा के पसंदीदा उद्धरण “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” स्वामी विवेकानंद

 

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अरुणिमा सिन्हा: कुछ अल्पज्ञात तथ्य व रोचक जानकारियाँ

  • अरुणिमा सिन्हा एक भारतीय पर्वतारोही हैं जो अपना पैर खोने के बाद माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली महिला बनीं।
  • सोनू सिन्हा का जन्म उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले में एक निम्न-मध्यम वर्गीय कायस्थ परिवार में हुआ था।
  • अरुणिमा बचपन से ही प्रतिस्पर्धी एथलीट रही हैं। वह स्कूल में कई तरह की एथलेटिक गतिविधियों में हिस्सा लेती थी।
  • अरुणिमा वॉलीबॉल में राष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिस्पर्धा कर चुकी हैं।

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  • जब अरुणिमा 12 अप्रैल, 2011 को सीआईएसएफ में शामिल होने के लिए परीक्षा देने के लिए लखनऊ से दिल्ली जाने वाली पद्मावती एक्सप्रेस ट्रेन में सवार हुई, तो तीन गुंडों ने जनरल कोच पर हमला किया और यात्रियों को लूटना शुरू कर दिया, यहां तक कि अरुणिमा से हार को जब्त करने का प्रयास भी किया। . जब अरुणिमा से लड़ाई हुई तो उन्होंने बरेली में चलती ट्रेन से अरुणिमा को धक्का दे दिया। अरुणिमा घटना को इस प्रकार याद करती हैं:

    I resisted and they pushed me out of the train. I could not move. I remember seeing a train coming towards me. I tried getting up. By then, the train had run over my leg. I don’t remember anything after that.”

    मैंने विरोध किया और उन्होंने मुझे ट्रेन से धक्का दे दिया। मैं हिल नहीं सकता था। मुझे याद है कि एक ट्रेन मेरी ओर आ रही थी। मैंने उठने की कोशिश की। तब तक ट्रेन मेरे पैर के ऊपर से निकल चुकी थी। उसके बाद मुझे कुछ भी याद नहीं है।”

  • इस घटना के परिणामस्वरूप अरुणिमा को पैर और श्रोणि में बड़ी चोटें आईं और उन्हें एम्स लाया गया, जहां सर्जनों ने उनकी जान बचाने के लिए अपना पैर खो दिया।

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  • दिल्ली, भारत में एक व्यवसाय ने उसे एक मुफ्त कृत्रिम पैर प्रदान किया।
  • भारतीय खेल मंत्रालय ने 25,000 के मौद्रिक मुआवजे की घोषणा की, जिससे राष्ट्रीय हंगामा हुआ। मंत्रालय ने राष्ट्रीय आक्रोश के जवाब में चिकित्सा सहायता के रूप में अतिरिक्त 200,000 मुआवजे की घोषणा की।
  • अरुणिमा को उसके ठीक होने के बाद सीआईएसएफ और भारतीय रेलवे द्वारा एक पद की पेशकश की गई थी।
  • एम्स में अरुणिमा का इलाज चार महीने तक चला। अरुणिमा ने अपने जीवन में कुछ महत्वपूर्ण हासिल करने का फैसला किया, और पहली बात जो दिमाग में आई वह थी माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना।
  • अरुणिमा की घटना ने तब राष्ट्रीय सुर्खियां बटोरीं जब उनका अभी भी एम्स में इलाज चल रहा था।
  • जानी-मानी ब्यूटीशियन शहनाज हुसैन ने उनसे एम्स में मुलाकात की और उन्हें नियमित कॉस्मेटिक उपचार देना शुरू किया।

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  • अरुणिमा ने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने के अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए उत्तरकाशी के नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ माउंटेनियरिंग में एक बुनियादी पर्वतारोहण पाठ्यक्रम पूरा किया।
  • माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली पहली भारतीय महिला बछेंद्री पाल से 2011 में फोन पर संपर्क किया गया था।
  • अरुणिमा को 2012 में टाटा स्टील एडवेंचर फाउंडेशन के उत्तरकाशी कैंप में बछेंद्री पाल द्वारा प्रशिक्षित किया गया था। (TSAF)।
  • अरुणिमा ने अपने एवरेस्ट प्रयास (6150 मीटर) की तैयारी के लिए द्वीप शिखर पर चढ़ाई की। वह 11 अप्रैल, 2013 को सुबह 10:00 बजे आईलैंड पीक के शिखर पर पहुंची।

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  • अरुणिमा ने 31 मार्च 2013 को माउंट एवरेस्ट की यात्रा शुरू की थी।
  • अरुणिमा सिन्हा 21 मई, 2013 को सुबह 10:55 बजे माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचीं, ऐसा करने वाली वह दुनिया की पहली विकलांग महिला बनीं। शिखर तक की उनकी यात्रा में 52 दिन लगे। अरुणिमा ने एक लपेटे हुए कपड़े पर भगवान को धन्यवाद देते हुए एक छोटा पत्र लिखा और उसे माउंट एवरेस्ट की चोटी पर बर्फ में दबा दिया। अरुणिमा घटना को इस प्रकार याद करती हैं:

It was my tribute to Shankara Bhagwan, and Swami Vivekananda who has been an inspiration throughout my life.”

यह शंकर भगवान और स्वामी विवेकानंद को मेरी श्रद्धांजलि थी, जो मेरे जीवन भर प्रेरणा रहे हैं।”

Arunima Sinha ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಶುಕ್ರವಾರ, ಡಿಸೆಂಬರ್ 5, 2014

  • एवरेस्ट की चढ़ाई के बाद, उन्हें उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सम्मानित किया, जिन्होंने उन्हें कुल रु। 25 लाख।
  • एवरेस्ट पर विजय प्राप्त करने के बाद, अरुणिमा सभी सात महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियों पर चढ़ने के लिए निकलीं।
  • 2014 तक, अरुणिमा ने छह चोटियों पर चढ़ाई की थी: रूस का माउंट एल्बर्स (5,642 मीटर/18,510 फीट), प्रमुखता 4,741 मीटर (15,554 फीट), और तंजानिया की किलिमंजारो (5,895 मीटर/19,341 फीट) और प्रमुखता 5,885 मीटर (19,308 फीट)।
  • 4 जनवरी, 2019 को, वह अंटार्कटिका की सातवीं सबसे ऊंची चोटी माउंट विंसन पर चढ़ गईं, ऐसा करने वाली वह दुनिया की पहली विकलांग महिला बन गईं

  • अरुणिमा सिन्हा ने “बोर्न अगेन ऑन द माउंटेन” नामक एक पुस्तक भी प्रकाशित की है, जिसका उद्घाटन दिसंबर 2014 में भारत के प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था।
  • अरुणिमा सिन्हा का अरुणिमा फाउंडेशन धर्मार्थ प्रयासों के लिए समर्पित है। अरुणिमा फाउंडेशन का उद्देश्य महिलाओं, विकलांग व्यक्तियों और सामान्य रूप से वंचित समुदायों के स्वास्थ्य, सामाजिक और आर्थिक स्थितियों में सुधार करके उन्हें सशक्त बनाना है।
  • लिम्का वर्ल्ड रिकॉर्ड ने भी अरुणिमा के प्रेरक कारनामे को मान्यता दी है।
  • अरुणिमा सिन्हा की उल्लेखनीय कहानी को पीपल मैगज़ीन सहित कई प्रसिद्ध मीडिया आउटलेट्स और पत्रिकाओं द्वारा रिपोर्ट किया गया है।
  • बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री आलिया भट्ट को कथित तौर पर मार्च 2019 में अरुणिमा की किताब बॉर्न अगेन ऑन द माउंटेन: ए स्टोरी ऑफ लॉजिंग एवरीथिंग एंड फाइंडिंग इट बैक पर आधारित एक बायोपिक में अरुणिमा सिन्हा की भूमिका के रूप में लिया गया था।

Arunima Sinha Biography in Hindi

हमें कभी भी हार नहीं माननी चाहिए

नाही हमें किसी भी दिक्कत को खुद को हराने का मौका देना चाहिए

– APJ  अब्दुल कलम

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आज हम बात करने जा रहे हैं उस लड़की की जिन की कहानी सुनकर आपको बहुत दुख भी होगा और बहुत खुशी भी – दुख यह जानकर कि किस्मत ने उनके साथ क्या किया खुशी यह जानकर कि मुसीबतों को चुनौती देकर उन्होंने कैसे एक मुकाम हासिल किया उन्होंने एक ऐसी परिस्थिति से उभरकर नई मंजिल हासिल की जहां से शायद कोई आम लड़का या लड़की अपने जीवन की सारी आशाएं ही खो देता यह कहानी भले ही किसी सुपरस्टार की नहीं है मगर एक रियल लाइफ हीरो की जरूर है हम बात करने जा रहे हैं अरुणिमा सिन्हा जी की|

अरुणिमा सिन्हा जी

अरुणिमा सिन्हा जी पैर से विकलांग होने के बावजूद माउंट एवरेस्ट चढ़ने वाली दुनिया की पहली विकलांग महिला बनी तो चलिए दोस्तों के बारे में शुरू से जानते हैं | पूरी जानकारी के लिए आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़िए और मुझे पूरी उम्मीद है कि इन से आपको बहुत मोटिवेशन मिलेगा

दोस्तों अरुणिमा सिन्हा जी का जन्म 20 जुलाई 1988 को उत्तर प्रदेश के अंबेडकर नगर जिले में हुआ था वह नेशनल लेवल पर वॉलीबॉल भी खेल चुकी हैं मगर वॉलीबॉल में कोई खास करिए ना होने के कारण उनके हाथ सिर्फ निराशा ही लगी और वह वापस से अपनी पढ़ाई में लग गई 12 अप्रैल 2011 को CISF में नौकरी के लिए टेस्ट देने दिल्ली जाने के लिए पद्मावती एक्सप्रेस में बैठी|

सोने की चेन

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उन्होंने अपनी गले में एक सोने की चेन पहनी हुई थी ट्रेन में कुछ गुंडे भी थे उनमें से एक ने चोरी की मंशा से उनके गले पर हाथ लगाया मगर अरुणिमा जी ने उसका विरोध किया | बाद में जब गुंडों को लगा कि वह ऐसे अपनी चेन नहीं देंगी तो उन सब ने उनके चैन को दबोच कर उन्हें ट्रेन के दरवाजे से धक्का दे दिया ताकि चैन उनके हाथ में आ जाए तब से दुर्भाग्यपूर्ण घटना यह हुई कि वह दूसरी पटरी पर जाकर और तुरंत उधर से दूसरी ट्रेन आ गई जिसकी वजह से उनका पैर कट गया सारी रात को ट्रैक पर पड़ी रही मगर मदद करने के लिए कोई भी आसपास नहीं था सुबह में पास के लोगों ने उन्हें हॉस्पिटल में एडमिट किया मगर उस घटना के बाद लोग तरह-तरह की बातें भी बनाने लगे कुछ लोगों ने यह बात फैला दी कि टिकट ना होने के कारण चेकिंग के वक्त वो ट्रेन से कूद गई और यह हादसा हो गया कुछ लोग यह भी कह रहे थे कि वह सुसाइड करने की कोशिश कर रही थी|

मुश्किल समय

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दोस्तों उस वक्त वो अपनी जिंदगी के बहुत मुश्किल समय से जूझ रही थी उसपर से लोगों की ऐसी बातों ने उन्हें परेशान कर दिया था पर उन्होंने फैसला लिया कि वह कुछ ऐसा करेंगी जिससे वह लोगों को अपनी अहमियत दिखा सके|

माउंट एवरेस्ट

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उन्होंने माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने का फैसला किया इसके बाद उन्होंने माउंटेन क्लाइंबिंग की ट्रेनिंग लेनी शुरू कर दी और कई महीने तक कड़ी मेहनत की उन्हें नकली पैर लगाया गया जिसके साथ उन्होंने एवरेस्ट की चढ़ाई शुरू की जब कुछ ही दूर का सफर बाकी रह गया था तो उनका ऑक्सीजन भी खत्म होने लगा और उनके साथ की गाइड ने उसे वापस चलने के लिए कहा और बोला कि जिंदगी रही तो फिर कभी कोशिश कर लेना मगर उन्हें इस बात की थी की चोटी पर तिरंगा फहराना है और दुनिया को दिखाना है कि वह क्या कर सकती हैं उन्होंने चढ़ाई पूरी की बाद में नीचे आते वक्त उनका ऑक्सीजन रास्ते में खत्म हो गया मगर किस्मत अच्छी थी कि उन्हें मदद मिल गई ऑक्सीजन के एक और पैकेट की |

इतिहास रच दिया

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इसके बाद उन्हें बहुत सम्मान मिलने लगा क्योंकि उन्होंने इतिहास रच दिया था एवरेस्ट पर चढ़ने वाली दुनिया की पहली विकलांग महिला बनने का इसके बाद वह पूरी दुनिया में फेमस हो गई और उन्हें वह गौरव मिल गया जिसके लिए उन्होंने कई महीने कठिन परिश्रम किया था|

शहीद चंद्रशेखर आजाद विकलांग खेल एकेडमी

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दोस्तों इस समय को सामाजिक कामों में अपना समय बिता रही हैं वह गरीब बच्चों और विकलांगों के लिए मुफ्त  स्पोर्ट्स एकेडमी खोलने के लिए काफी समय तक प्रयास करती रहें उन्हें कई सेमिनार के लिए बुलाया जाता है अपने अवार्ड और सेमिनार से मिलने वाले पैसे वो एकेडमी के लिए ही लगाती रही उनके प्रयासों के कारण उनका यह सपना भी पूरा हो गया और 27 नवंबर 2015 को रतन टाटा जी ने और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी ने इस एकेडमी का उद्घाटन किया जिसका नाम उन्होंने शहीद चंद्रशेखर आजाद विकलांग खेल एकेडमी रखा क्योंकि वह चंद्रशेखर आजाद जी को अपनी प्रेरणा का स्रोत मानती हैं इनका हौसला वाकई में काबिले तारीफ है और उन सभी के लिए प्रेरणा है जो छोटी-छोटी मुश्किलों से डर कर अपने लक्ष्य की तरफ नहीं पढ़ पाते इनके लिए बचपन में पढ़ी हुई रामधारी सिंह दिनकर जी की कविता याद आती है|

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सच है विपत्ति जब आती है कायर को ही दहलाती है

सूरमा नहीं विचलित होते छड़ एक नहीं धीरज खोते

विघ्नों को गले लगाते हैं कांटों में राह बनाते हैं

दोस्तों अगर आपको हमारा प्रयास पसंद आ रहा हो तो ऐसी ही और बायोग्राफी और सक्सेस स्टोरीज पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट को बुकमार्क कर ले |

धन्यवाद

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