Sonam Wangchuk Biography in Hindi |
सोनम वांगचुक का जीवन परिचय
आज हम आपको सोनम वांगचुक के बारे में बताएँगे , Sonam Wangchuk Biography in Hindi | सोनम वांगचुक का जीवन परिचय, दोस्तों 3 ईडियट मूवी तो आप सबने देखी ही होगी और उम्मीद है आपको पसंद भी आई होगी उसमें आमिर खान ने रणछोड़ दास श्यामल दास चारण का रोल किया है जिनका असली नाम फुनसुख वांगडू था लेकिन क्या आप जानते हैं कि फुनसुख वांगडू का यह किरदार एक व्यक्ति से प्रेरित है|

सोनम वांगचुक का व्यक्तिगत विवरण |
|
---|---|
सोनम वांगचुक का पूरा नाम | सोनम वांगचुक |
सोनम वांगचुक का वैकल्पिक नाम | स्नो वारियर |
सोनम वांगचुक का पेशा | इंजीनियर, इनोवेटर, आदि |
सोनम वांगचुक की जन्म तिथि | 1 सितंबर 1966 |
सोनम वांगचुक की आयु | 55 वर्ष ( 2022 में ) |
सोनम वांगचुक के निवासी स्थान | उली टोकपो, लद्दाख, भारत में |
सोनम वांगचुक की राष्ट्रीयता | भारतीय राष्ट्रीयता |
सोनम वांगचुक के पिता | सोनम वांग्याल (पूर्व राजनेता) |
सोनम वांगचुक की शिक्षा विवरण |
|
---|---|
सोनम वांगचुक की योग्यता | मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक, मिट्टी के आर्किटेक्चर में मास्टर्स |
सोनम वांगचुक का स्कूल | विशेश केन्द्रीय विद्यालय, दिल्ली से |
सोनम वांगचुक का कॉलेज | नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (NIT), श्रीनगर क्रैटर स्कूल ऑफ आर्किटेक्चर, ग्रेनोबल, फ्रांस, आदि |
सोनम वांगचुक का भौतिक विवरण |
|
---|---|
सोनम वांगचुक की लम्बाई | 172 सेंटीमीटर |
सोनम वांगचुक का वजन | 71 किलोग्राम |
सोनम वांगचुक की आंखों का रंग | गहरा भूरा रंग |
सोनम वांगचुक के बालों का रंग | कुछ काले , भूरे जैसे |
सोनम वांगचुक का नवाचार और पुरस्कार विवरण |
|
---|---|
सोनम वांगचुक का आइस स्तूप नवाचार | अक्टूबर 2013 |
सोनम वांगचुक का सौर गर्म सैन्य तम्बू | 19 फरवरी 2021 |
सोनम वांगचुक का लद्दाख के छात्रों के शैक्षिक और सांस्कृतिक आंदोलन | 1988 में |
सोनम वांगचुक का अंतर्राष्ट्रीय टेरा पुरस्कार | जुलाई 2016को |
सोनम वांगचुक का रोमन मेगासिस पुरस्कार | 2018 में |
सोनम वांगचुक का राज्यपाल पुरस्कार | 1996 में |
Sonam Wangchuk Biography in Hindi | सोनम वांगचुक का जीवन परिचय
स्कूलों फॉर फेलियर

जी हां दोस्तों आज हम बात करने जा रहे हैं सोनम वांगचुक के बारे में जिनका जीवन हम सब के लिए प्रेरणा का स्रोत है जो काफी जीनियस हैं मगर अपने टैलेंट को अपने नहीं बल्कि सामाजिक बदलाव के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं जिन्होंने बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के लिए स्कूलों फॉर फेलियर शुरू किया और लद्दाख के पहाड़ों पर खेती के लिए पानी की कमी दूर हो जाए जिसके लिए आइस स्तूप प्रोजेक्ट शुरू किया | जो अपने आप में एक अजूबा है तो चलिए जानते हैं कि कैसे सोनम वांगचुक अपने प्रयासों से लद्दाख में लोगों की जीवन को बदल रहे हैं|
बोर्ड के एग्जाम में फेल

दोस्तों एक समय था जब लद्दाख में लगभग 95 % बचे बोर्ड के एग्जाम में फेल हो जाते थे तब सोनम वांगचुक ने और लोगों के साथ मिलकर स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख नाम का एक एनजीओ शुरू किया | जिसका लक्ष्य था एजुकेशन सिस्टम को बदलना | बोर्ड की मदद से इस एनजीओ ने स्कूल की टेक्सटबुक्स में कई सारे बदलाव किए और टीचर्स को ट्रेनिंग दी थी परिणाम यह हुआ कि जहां 1996 के बोर्ड के एग्जाम में से 5 % बच्चे पास हुए थे | वहीं 2000 में 23 परसेंट बच्चे पास हुए और 2015 तक बोर्ड एग्जाम पास करने वाले बच्चों का परसेंटेज बढ़कर 75% पहुंच गया|
लद्दाख में एक स्कूल

उन्होंने लद्दाख में एक स्कूल खोला है जहां बच्चों की किताबी शिक्षा से ज्यादा प्रैक्टिकल पर ध्यान दिया जाता है उन्हें कई तरह के नए प्रोजेक्ट में काम करना सिखाया जाता है ताकि असल जिंदगी की परेशानियों को दूर किया जा सके –
- वहां पर बच्चे खुद ही स्कूल का मैनेजमेंट भी संभालते हैं जिससे वह मैनेजमेंट करने की क्षमता विकसित कर सके|
- वहां बच्चे कैंपस का न्यूज़ पेपर और रेडियो चलाते हैं|
- अपने खुद के स्कूल को डिजाइन करने का काम भी बच्चे खुद ही करते हैं |
इस स्कूल की बिल्डिंग सूरज की रोशनी से गर्म होने वाली दीवारों से बनी है जिन का अंदर का तापमान 15 डिग्री सेल्सियस रहता है भले ही बाहर का तापमान -15 डिग्री सेल्सियस हो जाए | इस स्कूल में एडमिशन पाने के लिए कोई एग्जाम नहीं होता बल्कि उनका एडमिशन होता है जो आम स्कूलों में अच्छे से पढ़ाई नहीं कर पाते |
आइस स्तूप

उन्होंने 2013 में पानी बचाने के लिए आइस स्तूप बनाने का एक प्रोजेक्ट शुरू किया | जो काफी सफलता पूर्वक अपना काम कर रहा है इसमें जाड़े के मौसम में कोन के आकार में पानी एकत्रित किया जाता है और अप्रैल-मई के महीनों में जब गर्मी पड़ती है तब यह पानी इस्तेमाल होता है उनका खासा आकर बर्फ के पानी को वर्क के रूप में बनाए रखने के लिए जरूरी है वरना महीनों तक पानी जमा रखने वाले आइस स्तूप सिर्फ 10 दिन में पिघल जाते और कोई फायदा नहीं होता यह लद्दाख में खेती के लिए पानी की कमी को दूर करने में मदद करते हैं कि एक स्तूप में लगभग 20 लाख लीटर पानी इकट्ठा हो जाता है|
5000 पेड़

सोनम वांगचुक का सपना है कि यह आइस स्तूप पूरे हिमालय में लगाए जा सके ताकि पानी की कमी दूर हो जाए और खेती करने में भी आसानी हो | 2015 में 5000 पेड़ लगाए गए थे जिन्हें हर सीजन में इन्हीं आइस स्तूप से पानी दिया जाता है इसके अलावा सोनम वांगड़ू एक और प्रोजेक्ट के लिए काम कर रहे हैं वो एक ऐसी यूनिवर्सिटी खोलना चाहते हैं जहां सारी पढ़ाई प्रैक्टिकल की हो
सिर्फ कागज की ना हो जहा :-
- स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के स्टूडेंट्स असली बिजनेस को संभालकर मैनेजमेंट की शिक्षा लें
- स्कूल आफ एजुकेशन के स्टूडेंट्स इनोवेटिव स्कूल चलाएं यानी हर पढ़ाई सिर्फ पढ़ाई ना हो बल्कि उन्हें वास्तव में करके सीखा जाए
इस प्रोजेक्ट के लिए गवर्नमेंट से उन्हें मदद भी मिल रही है तो दोस्तों देखा ना आपने कि जिनके गांव में एक स्कूल भी नहीं था वह शिक्षा में बदलाव लाने के लिए कैसे कदम उठा रहे हैं आपको यह पोस्ट कैसी लगी कमेंट करके हमें बताएं
आज हमने आपको इस आर्टिकल में सोनम वांगचुक के बारे में कुछ बाते, उनका जीवन परिचय, और उनसे जुड़े कुछ रोचक तथ्य व सम्पूर्ण जानकारिया साझा की | Sonam Wangchuk Biography in Hindi | सोनम वांगचुक का जीवन परिचय , तो चलिए मिलते है| अगले नए आर्टिकल के साथ – धन्यवाद